नई दिल्ली (ईएमएस)। उपराष्ट्रपति, एम. वेंकैया नायडू ने आज अमृतसर में जलियांवाला बाग की यात्रा करते हुए भारत में ब्रिटिश शासन के सबसे काले अध्याय और मानव इतिहास के सबसे रक्त रंजित जलियांवाला बाग नरसंहार की 100वीं वर्षगांठ पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इस श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था। श्री नायडू ने स्मारक स्थल पर शहीदों को अपनी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार की 100वीं वर्षगांठ पर जा किया। उपराष्ट्रपति को स्मारक के पुनरोद्धार से संबंधित प्रस्तावित कार्यों की भी जानकारी दी गई। श्री नायडू ने ट्वीट करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग नरसंहार हम में से हर एक को यह याद दिलाता है कि हमारी आजादी कितनी कठिन और मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना 1919 में बैसाखी के ही दिन की गई औपनिवेशिक क्रूरता और विवेकहीन क्रोध को दशार्ती है, जिसके लिए यह दिन म हत्याकांड में शहीद हा प्रत्येक निर्दोष भारतीय के लिए मौन अश्रु बहाने का एक मार्मिक क्षण हैं। उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि इस अमानवीय नरसंहार को भले ही 100 वर्ष व्यतीत हो गए हों लेकिन इसकी पीटा और वेदना आज भी हर भारतीय के हृदय में व्याप्त है, इतिहास घटनाओं का मात्र क्रम ही नहीं है, बल्कि गट ट] गटाटयों के साथ अतीत में घटी घटायों से सीखने की प्रेरणा देने के साथ-साथ उनसे सावधान रहने के लिए भी सचेत करता है। यह हमें यह भी दशार्ता है कि बुराई की शक्ति क्षणिक होती मी झिालोनी है। श्री नायडू ने लोगों से इतिहास से सबक लेने और मानवता के लिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।